मार्गदर्शिका
राशि क्या है?
संक्षेप में
राशि क्या है?
राशि निरयण राशिचक्र के बारह 30-अंश वाले विभागों में से एक है। हर राशि का एक स्वामी ग्रह, एक तत्व और एक स्वभाव होता है, और हर राशि में सवा दो नक्षत्र आते हैं। आपकी राशि वही है जिसमें जन्म के समय चन्द्रमा था।
तीस अंश के बारह विभाग
राशिचक्र क्रान्तिवृत्त के साथ 360 अंश की पट्टी है। वैदिक ज्योतिष इसे 30-30 अंश की बारह समान राशियों में बाँटता है, जो मेष से आरम्भ होती हैं। पाश्चात्य सायन राशिचक्र वसन्त सम्पात से बँधा है, जबकि निरयण राशिचक्र नक्षत्रों पर स्थिर है — इसी कारण दोनों में अन्तर आ गया है।
हर राशि का एक स्वामी ग्रह, एक तत्व (अग्नि, पृथ्वी, वायु या जल) और एक स्वभाव (चर, स्थिर या द्विस्वभाव) होता है। ये तीनों मिलकर वह संक्षिप्त परिचय बनाते हैं जिसे कोई भी पाठक सबसे पहले देखता है: वे बताते हैं कि राशि आरम्भ करती है, थामती है, या ढलती है — और किस रंग में।
राशि और नक्षत्र अलग विभाजन हैं
वही 360 अंश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में भी बँटे हैं। दोनों विभाजन आपस में मेल नहीं खाते: एक राशि में सवा दो नक्षत्र आते हैं, इसलिए नक्षत्रों की सीमाएँ राशियों के किनारों पर नहीं, उनके भीतर पड़ती हैं।
नक्षत्र इसलिए महत्वपूर्ण है कि वह अधिक सूक्ष्म है और वही विंशोत्तरी दशा तय करता है — ग्रह-कालों का वह क्रम जो वैदिक ज्योतिष में पूरे जीवन का ढाँचा बनाता है। एक ही राशि पर भिन्न नक्षत्र वाले दो व्यक्तियों की कुंडलियाँ बहुत भिन्न हो सकती हैं।