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भकूट दोष क्या है?

संक्षेप में

भकूट दोष क्या है?

भकूट दोष तब होता है जब दोनों चन्द्र राशियाँ एक-दूसरे से कुछ विशेष दूरियों पर पड़ें — 2/12, 5/9 या 6/8 जोड़े। इनमें से कोई भी होने पर भकूट के सात में से शून्य अंक मिलते हैं। नाड़ी के बाद यह दूसरा सबसे भारी कूट है।

तीन दूषित दूरियाँ

एक व्यक्ति की राशि से दूसरे की राशि तक दोनों दिशाओं में गिनें। यदि गणना की जोड़ी 2 और 12, 5 और 9, या 6 और 8 बनती है, तो भकूट दोष है। शेष हर दूरी पर पूरे सात अंक मिलते हैं।

परम्परागत फल हर जोड़ी के लिए अलग है: 2/12 को आर्थिक तनाव से, 5/9 को सन्तान सम्बन्धी कठिनाई से, और 6/8 को स्वास्थ्य तथा सामान्य टकराव से जोड़ा जाता है। 6/8 योग, जिसे कभी-कभी षडाष्टक कहते हैं, प्रायः तीनों में सबसे गम्भीर माना जाता है।

यह कब निरस्त माना जाता है

सामान्यतः बताए गए निरसन ये हैं: जब दोनों राशियों के स्वामी मित्र हों या एक ही ग्रह हों, और जब ग्रह मैत्री में पहले से अच्छे अंक आ रहे हों। कुछ आचार्य तब भी निरसन मानते हैं जब दोनों राशियों का स्वामी एक ही ग्रह हो — जैसे मेष और वृश्चिक, दोनों के स्वामी मंगल।

नाड़ी की तरह यहाँ भी कठोरता भिन्न-भिन्न है। गणना निश्चित है; व्याख्या नहीं।

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