मार्गदर्शिका
पंचांग क्या है?
संक्षेप में
पंचांग क्या है?
पंचांग का अर्थ है 'पाँच अंग'। यह किसी दिन का हिन्दू पंचांग है, जो तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण बताता है। इनके साथ यह सूर्योदय, सूर्यास्त और शुभ-अशुभ समय भी देता है, जो सभी आपके स्थान पर निर्भर हैं।
पाँच अंग
तिथि चन्द्र दिवस है: वह समय जो चन्द्रमा को सूर्य से 12 अंश आगे बढ़ने में लगता है। एक चन्द्र मास में तीस तिथियाँ होती हैं, हर पक्ष में पन्द्रह। नक्षत्र चन्द्रमा का भवन है। योग सूर्य और चन्द्रमा के देशान्तरों के योग का 27 भागों में विभाजन है, और करण आधी तिथि है, जिनकी मास में साठ संख्या और ग्यारह नाम हैं।
वार केवल सप्ताह का दिन है, पर वह दिखने से अधिक महत्वपूर्ण है: राहु काल और चौघड़िया क्रम सहित कई मुहूर्त इसी से तय होते हैं कि सप्ताह का कौन-सा दिन है।
पंचांग स्थान-विशेष क्यों है
सूर्योदय से बँधी हर चीज़ आपके स्थान के साथ बदलती है। राहु काल दिन के प्रकाश-काल का आठवाँ विभाग है, इसलिए वह काठमांडू में दिल्ली से भिन्न घड़ी-समय पर आरम्भ और समाप्त होता है, और दिसम्बर में जून से भिन्न समय पर।
पाँचों अंग स्वयं सूर्योदय पर पढ़े जाते हैं, जो दिन का परम्परागत आरम्भ है — मध्यरात्रि नहीं। इसीलिए एक ही तिथि का पंचांग दो नगरों में अलग तिथि बता सकता है।