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विंशोत्तरी दशा कैलकुलेटर

इस समय कौन सी महादशा चल रही है, कब समाप्त होगी, और जन्म नक्षत्र से पूरा 120 वर्ष का क्रम।

संक्षेप में

विंशोत्तरी दशा क्या है?

विंशोत्तरी ग्रह-कालों का 120 वर्ष का चक्र है। नौ ग्रहों में से हर एक एक महादशा का स्वामी है, जिसकी अवधि निश्चित है — सूर्य के छह वर्ष से शुक्र के बीस तक। आप किस महादशा में जन्मे और उसमें कितना शेष है, यह जन्म के समय चन्द्रमा की नक्षत्र के भीतर की स्थिति तय करती है।

यह कैलकुलेटर पूरी तरह आपके ब्राउज़र में चलता है। आपका जन्म विवरण हमें कभी नहीं भेजा जाता, न कहीं संग्रहीत होता है, न लॉग किया जाता है।

इस समय कौन सी महादशा चल रही है, कब समाप्त होगी, और जन्म नक्षत्र से पूरा 120 वर्ष का क्रम।

पहली दशा कैसे तय होती है

27 नक्षत्र नौ ग्रहों को तीन बार, एक निश्चित क्रम में बाँटे गए हैं: केतु, शुक्र, सूर्य, चन्द्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध। जन्म के समय चन्द्रमा जिस नक्षत्र में था, उसका स्वामी आपकी पहली महादशा का स्वामी है।

पूरी महादशा नहीं मिलती। उस नक्षत्र का जितना भाग चन्द्रमा पार कर चुका था, दशा का उतना भाग बीत चुका माना जाता है — इसलिए रोहिणी के अंत में जन्मा व्यक्ति चन्द्र की दस वर्ष की दशा का केवल एक अंश लेकर आता है।

क्रम और अवधि

केतु 7 वर्ष, शुक्र 20, सूर्य 6, चन्द्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19, बुध 17। कुल 120 वर्ष — नाम यहीं से आया है, विंशोत्तरी अर्थात् एक सौ बीस।

क्रम कभी नहीं बदलता। एक बार आरम्भिक स्वामी ज्ञात हो जाए तो आगे की हर तिथि केवल गणित है।

महादशा का अर्थ कैसे लिया जाता है

महादशा वह काल मानी जाती है जिसमें उस ग्रह की कुण्डली में की गई प्रतिज्ञाएँ फलित होती हैं — यह शुभ या अशुभ का निर्णय नहीं है। सुस्थित शनि और पीड़ित शनि का पाठ बिलकुल अलग होता है, और वही उन्नीस वर्ष अलग कुण्डलियों में अलग अर्थ रखते हैं।

हर महादशा उसी अनुपात और उसी क्रम में अन्तर्दशाओं में बँटती है, जिससे उन्नीस वर्ष को अधिक सूक्ष्मता से पढ़ा जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभी मेरी कौन सी महादशा चल रही है?

ऊपर अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान भरिए। कैलकुलेटर चन्द्र नक्षत्र निकालता है, चन्द्रमा उस नक्षत्र में कितना बढ़ चुका था उससे पहली दशा का शेष निकालता है, और आज की तारीख वाली दशा चिह्नित कर देता है।

हर महादशा कितने वर्ष की होती है?

केतु 7, शुक्र 20, सूर्य 6, चन्द्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19 और बुध 17 वर्ष — कुल 120, सदा इसी क्रम में।

क्या शनि की महादशा का अर्थ उन्नीस बुरे वर्ष है?

नहीं। महादशा उस ग्रह की भूमिका को सामने लाती है। सुस्थित शनि वही काल हो सकता है जिसमें करियर जमता है; पीड़ित शनि में वही उन्नीस वर्ष अलग पढ़े जाते हैं। दशा बताती है किसकी बारी है, परिणाम क्या होगा यह नहीं।

अन्तर्दशा क्या है?

महादशा का उपविभाजन। हर महादशा नौ ग्रहों में उसी अनुपात और उसी क्रम में बँटती है, जिससे काल को उन्नीस वर्ष से अधिक सूक्ष्मता से पढ़ा जा सके।

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