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स्वामी ग्रह: बुध

आश्लेषा नक्षत्र

संक्षेप में

आश्लेषा नक्षत्र क्या है?

आश्लेषा 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 106°40′–120°00′ में फैला है और कर्क में पड़ता है। इसके स्वामी बुध हैं, गण राक्षस, नाड़ी अन्त्य और योनि मार्जार है।

सर्प नक्षत्र। भेदक अन्तर्दृष्टि, सम्मोहक प्रभाव और ऐसे ज्ञान से जुड़ा जो बाँटा नहीं, थामा जाता है।

स्वामी ग्रह
बुध
राशिचक्र में विस्तार
106°40′ – 120°00′
राशि
कर्क
पाद
4 × 3°20′
गण
राक्षस
नाड़ी
अन्त्य
योनि
मार्जार
प्रतीक
कुण्डलित सर्प
देवता
नाग
विंशोत्तरी दशा
बुध · 17 वर्ष

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आश्लेषा नक्षत्र क्या है?

आश्लेषा 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 106°40′–120°00′ में फैला है और कर्क में पड़ता है। इसके स्वामी बुध हैं, गण राक्षस, नाड़ी अन्त्य और योनि मार्जार है।

आश्लेषा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?

बुध। इसी स्वामित्व के कारण आश्लेषा में जन्मे व्यक्ति का जीवन बुध की महादशा से आरम्भ होता है, जो विंशोत्तरी चक्र में 17 वर्ष चलती है।

आश्लेषा किस राशि में पड़ता है?

कर्क। नक्षत्र 13°20′ का होता है और राशि 30° की, इसलिए अधिकांश नक्षत्र किसी एक राशि में पूरी तरह न बैठकर सीमा पार करते हैं।

आश्लेषा का गण और नाड़ी क्या है?

आश्लेषा का गण राक्षस और नाड़ी अन्त्य है। दोनों अष्टकूट मिलान में प्रयोग होते हैं — गण छह अंकों का और नाड़ी आठ अंकों की।

आश्लेषा की योनि क्या है?

मार्जार। योनि कूट दो जन्म नक्षत्रों को दिए गए पशुओं की तुलना करता है और 36 में से चार अंकों का है।

आश्लेषा में कितने पाद होते हैं?

चार, हर नक्षत्र की तरह। हर पाद 3°20′ का होता है, जिससे पूरे राशिचक्र में 108 पाद बनते हैं।

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