नई दिल्ली
पंचांग · नई दिल्ली
नई दिल्ली · रविवार, 25 अक्टूबर 2026
पाँच अंग
- वार
- रविवार
- तिथि
- चतुर्दशी · शुक्ल पक्ष
- चन्द्र नक्षत्र
- रेवती · पाद 2
- योग
- हर्षण
- करण
- वणिज
- चन्द्रमा
- मीन
- सूर्य
- तुला
सूर्योदय · सूर्यास्त
- सूर्योदय
- 06:28
- सूर्यास्त
- 17:42
- चन्द्रोदय
- 17:11
- चन्द्रास्त
- 05:19
मुहूर्त
- अभिजित मुहूर्त
- 11:42 – 12:27
- राहु काल
- 16:17 – 17:42
- यमगण्ड
- 12:05 – 13:29
- गुलिक काल
- 14:53 – 16:17
संक्षेप में
आज का पंचांग क्या है?
पंचांग का अर्थ है पाँच अंग: किसी दिन की तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इनके साथ यह सूर्योदय-सूर्यास्त और उनसे निकले शुभ-अशुभ काल भी देता है — राहु काल, अभिजित मुहूर्त और चौघड़िया। यह सब आपके स्थान पर निर्भर है।
दिन का चौघड़िया
- उद्वेगटालें06:28 – 07:52
- चरशुभ07:52 – 09:16
- लाभशुभ09:16 – 10:40
- अमृतशुभ10:40 – 12:05
- कालटालें12:05 – 13:29
- शुभशुभ13:29 – 14:53
- रोगटालें14:53 – 16:17
- उद्वेगटालें16:17 – 17:42
रात का चौघड़िया
- शुभशुभ17:42 – 19:17
- रोगटालें19:17 – 20:53
- उद्वेगटालें20:53 – 22:29
- चरशुभ22:29 – 00:05
- लाभशुभ00:05 – 01:41
- अमृतशुभ01:41 – 03:17
- कालटालें03:17 – 04:52
- शुभशुभ04:52 – 06:28
तिथि
तिथि चन्द्र दिवस है: चन्द्रमा को सूर्य से बारह अंश आगे बढ़ने में लगा समय। एक चन्द्र मास में तीस तिथियाँ होती हैं, हर पक्ष में पन्द्रह — चन्द्रमा बढ़ते हुए शुक्ल, घटते हुए कृष्ण।
नक्षत्र
नक्षत्र वह चन्द्र भवन है जिसमें चन्द्रमा है, 13°20′ के 27 विभागों में से एक। चन्द्रमा लगभग प्रतिदिन एक नक्षत्र पार करता है, इसलिए तिथि के बाद यही सबसे तेज़ बदलने वाला अंग है।
योग और करण
योग सूर्य और चन्द्रमा के निरयण देशान्तरों के योग को 27 भागों में बाँटता है। करण आधी तिथि है — चन्द्र मास में साठ, और ग्यारह नाम: सात जो दोहराए जाते हैं और चार जो एक-एक बार आते हैं।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय से बँधी हर चीज़ स्थान के साथ बदलती है। पाँचों अंग स्वयं सूर्योदय पर पढ़े जाते हैं, जो दिन का परम्परागत आरम्भ है — मध्यरात्रि नहीं। इसीलिए एक ही तिथि का पंचांग दो नगरों में भिन्न तिथि बता सकता है।
राहु काल
राहु काल दिन के प्रकाश-काल का आठवाँ भाग है, और कौन-सा आठवाँ यह वार से तय होता है। परम्परा से इसमें कोई नया कार्य आरम्भ नहीं किया जाता। चूँकि यह दिन की लम्बाई का अंश है, यह काठमांडू और दिल्ली में भिन्न घड़ी-समय पर आता है, और दिसम्बर में जून से भिन्न समय पर।
अभिजित मुहूर्त
अभिजित पन्द्रह मुहूर्तों में आठवाँ है — वही जो स्थानीय मध्याह्न के दोनों ओर पड़ता है। इसे व्यापक रूप से शुभ माना जाता है और जब कोई विशेष मुहूर्त न चुना गया हो तब प्रायः यही बताया जाता है।
चौघड़िया
चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है, जो सात नामों के चक्र में चलते हैं। अमृत, शुभ, लाभ और चर शुभ माने जाते हैं; उद्वेग, काल और रोग नहीं। दिन किस नाम से आरम्भ होगा यह वार तय करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पंचांग क्या है?
किसी दिन का हिन्दू पंचांग, जो उसके पाँच अंग बताता है: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। साथ ही सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे निकले मुहूर्त।
आज की तिथि क्या है?
आपके चुने हुए नगर के लिए वर्तमान तिथि और पक्ष इस पृष्ठ के ऊपर दिए हैं। तिथि चन्द्रमा को सूर्य से बारह अंश आगे बढ़ने में लगा समय है; चन्द्र मास में तीस होती हैं।
आज राहु काल कब है?
आपके चुने हुए नगर का आज का राहु काल ऊपर दिया है। यह दिन के प्रकाश-काल का आठवाँ भाग है, वार से चुना जाता है, और इसमें नया कार्य आरम्भ करना टाला जाता है।
पंचांग नगर के अनुसार क्यों बदलता है?
क्योंकि पाँचों अंग सूर्योदय पर पढ़े जाते हैं और मुहूर्त दिन की लम्बाई के अंश हैं। दोनों अक्षांश-देशान्तर पर निर्भर हैं, इसलिए एक ही तिथि काठमांडू और दिल्ली में भिन्न मान देती है।
अभिजित मुहूर्त क्या है?
दिन के पन्द्रह मुहूर्तों में आठवाँ, जो स्थानीय मध्याह्न के दोनों ओर पड़ता है। इसे व्यापक रूप से शुभ माना जाता है।
चौघड़िया क्या है?
दिन और रात का आठ-आठ भागों में विभाजन, जो सात नामों के चक्र में चलता है। अमृत, शुभ, लाभ और चर शुभ हैं; उद्वेग, काल और रोग टाले जाते हैं।