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स्वामी ग्रह: केतु

अश्विनी नक्षत्र

संक्षेप में

अश्विनी नक्षत्र क्या है?

अश्विनी 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 0°00′–13°20′ में फैला है और मेष में पड़ता है। इसके स्वामी केतु हैं, गण देव, नाड़ी आदि और योनि अश्व है।

पहला और सबसे तीव्र नक्षत्र। उपचार, गति और आरम्भ से जुड़ा — अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य हैं।

स्वामी ग्रह
केतु
राशिचक्र में विस्तार
0°00′ – 13°20′
राशि
मेष
पाद
4 × 3°20′
गण
देव
नाड़ी
आदि
योनि
अश्व
प्रतीक
अश्व-मस्तक
देवता
अश्विनी कुमार
विंशोत्तरी दशा
केतु · 7 वर्ष

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अश्विनी नक्षत्र क्या है?

अश्विनी 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 0°00′–13°20′ में फैला है और मेष में पड़ता है। इसके स्वामी केतु हैं, गण देव, नाड़ी आदि और योनि अश्व है।

अश्विनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?

केतु। इसी स्वामित्व के कारण अश्विनी में जन्मे व्यक्ति का जीवन केतु की महादशा से आरम्भ होता है, जो विंशोत्तरी चक्र में 7 वर्ष चलती है।

अश्विनी किस राशि में पड़ता है?

मेष। नक्षत्र 13°20′ का होता है और राशि 30° की, इसलिए अधिकांश नक्षत्र किसी एक राशि में पूरी तरह न बैठकर सीमा पार करते हैं।

अश्विनी का गण और नाड़ी क्या है?

अश्विनी का गण देव और नाड़ी आदि है। दोनों अष्टकूट मिलान में प्रयोग होते हैं — गण छह अंकों का और नाड़ी आठ अंकों की।

अश्विनी की योनि क्या है?

अश्व। योनि कूट दो जन्म नक्षत्रों को दिए गए पशुओं की तुलना करता है और 36 में से चार अंकों का है।

अश्विनी में कितने पाद होते हैं?

चार, हर नक्षत्र की तरह। हर पाद 3°20′ का होता है, जिससे पूरे राशिचक्र में 108 पाद बनते हैं।

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