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14 अप्रैल – 14 मई

मेष राशि

संक्षेप में

3.5/ 5 · समग्र

चन्द्रमा आपकी ही राशि से गोचर कर रहा है, इसलिए आज आपका मन ही हर काम का रंग तय करेगा। तर्क से ज़्यादा भावना हावी रहेगी। दिन को हल्का रखें।

चन्द्रमा केतु के नक्षत्र में है, जो शोर घटाकर अन्तर्ज्ञान तेज़ करता है। जिसे आप अब तक ऊपर से सही मान रहे थे, आज उसकी असलियत दिखेगी।

विस्तार से

प्रेम और सम्बन्ध

3.5

आपको निकटता और एकांत दोनों बराबर चाहिए, जो सामने वाला समझ नहीं पाएगा। साफ़ बता दें।

करियर और कार्यक्षेत्र

3

प्रगति है, पर असमान। पहले छोटे दायित्व निपटाएँ; बड़ा काम अभी हिलने को तैयार नहीं।

धन और वित्त

3.5

आय और व्यय लगभग बराबर रहेंगे। स्थिति सुधारने के बजाय सँभालकर रखें।

स्वास्थ्य और ऊर्जा

3

छोटी बातों का ध्यान रखें: पानी, स्क्रीन का समय, और खड़े-खड़े खाया गया भोजन।

शुभ अंक
27
शुभ रंग
मरून
शुभ समय
12:00 – 13:30

सुझाया गया उपाय

सन्ध्या के समय घी का दीपक जलाएँ और उसके बाद कुछ क्षण मौन रहें।

मेष राशि का परिचय

मेष आरम्भ करती है। मंगल के स्वामित्व वाली यह राशि सोचने से पहले चल पड़ती है — यही इसका वरदान है और यही इसका बार-बार आने वाला बिल। मेष प्रधान व्यक्ति स्पष्टवादी, शारीरिक रूप से बेचैन और सहमति का दिखावा करने में लगभग असमर्थ होते हैं। वे असफलता से असामान्य रूप से जल्दी उबरते हैं — कुछ इसलिए कि वे अटकते नहीं, कुछ इसलिए कि अगला काम शुरू कर चुके होते हैं। मेष के लिए जीवन भर का पाठ यही है कि धैर्य हार नहीं, बल का ही एक रूप है।

मेष राशि, जिसे अंग्रेज़ी में Aries कहते हैं, निरयण राशिचक्र में मेढ़ा की राशि है और इसके स्वामी मंगल हैं। यह अग्नि तत्व की चर राशि है — वैदिक ज्योतिष में यही जोड़ी बताती है कि कोई राशि काम आरम्भ करती है, उसे थामे रखती है, या उसके अनुसार ढल जाती है।

निरयण राशिचक्र में सूर्य लगभग 14 अप्रैल से 14 मई तक मेष में रहता है। पाश्चात्य ज्योतिष सायन राशिचक्र मानता है, जिसमें Aries की अवधि 21 मार्च – 19 अप्रैल है। दोनों में लगभग 24 अंश का अन्तर है — यही अयनांश है — और इसी कारण आपकी वैदिक राशि प्रायः पाश्चात्य राशि से एक पहले पड़ती है।

मेष में अश्विनी, भरणी, कृत्तिका (पाद 1) आते हैं। प्रत्येक राशि 30 अंश की होती है और उसमें सवा दो नक्षत्र समाते हैं, इसलिए नक्षत्र किसी ग्रह की स्थिति राशि से कहीं अधिक सूक्ष्मता से बताता है — और आपकी विंशोत्तरी दशा का क्रम भी नक्षत्र से ही तय होता है।

भारतीय और नेपाली परम्परा में आपकी राशि चन्द्र राशि होती है, अर्थात् जन्म के समय चन्द्रमा जिस राशि में था — सूर्य नहीं। मन का कारक चन्द्रमा है, और दैनिक राशिफल वास्तव में आपकी राशि से गिने गए चन्द्रमा के दैनिक गोचर को ही पढ़ता है।

परम्परागत मिलान में मेष को सिंह, धनु के साथ सहज धरातल मिलता है, जहाँ तत्व और स्वामी ग्रह सहमत होते हैं। तुला अधिक परिश्रम माँगती है — असंगति नहीं, बल्कि गति और प्राथमिकता का अन्तर, जिसे मान लेने के बजाय कह देना पड़ता है। अष्टकूट गुण मिलान केवल राशि नहीं, आठ कारक देखता है, इसलिए राशि-से-राशि अनुकूलता को अन्तिम निर्णय नहीं, पहला संकेत मानें।

स्वामी ग्रह
मंगल
तत्व
अग्नि
स्वभाव
चर
प्रतीक
मेढ़ा
नक्षत्र
अश्विनी, भरणी, कृत्तिका (पाद 1)
सूर्य का इस राशि में गोचर
14 अप्रैल – 14 मई
पाश्चात्य (सायन) तिथियाँ
21 मार्च – 19 अप्रैल
रत्न
मूँगा
शुभ दिन
मंगलवार

नक्षत्र

विधि

यह राशिफल किस गणना पर आधारित है

यह भविष्यवाणी जिन निरयण स्थितियों से निकाली गई है, वे नीचे दी गई हैं। इनमें से हर एक को आप किसी भी पंचांग से मिला सकते हैं।

चन्द्रमा
मेष
सूर्य
सिंह
चन्द्र नक्षत्र
अश्विनी · पाद 2
तिथि
पंचमी · कृष्ण पक्ष
चन्द्र गोचर
प्रथम भाव (आपकी राशि से)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेष राशि की तिथियाँ क्या हैं?

निरयण राशिचक्र में सूर्य प्रतिवर्ष लगभग 14 अप्रैल से 14 मई तक मेष में गोचर करता है। पाश्चात्य सायन राशिचक्र में Aries की अवधि 21 मार्च – 19 अप्रैल है। लगभग तीन सप्ताह का यह अन्तर अयनांश है — नक्षत्र-आधारित और सम्पात-आधारित राशिचक्रों के बीच संचित अयन-गति।

मेष राशि का स्वामी ग्रह कौन है?

मेष के स्वामी मंगल हैं। मेष की कुण्डली पढ़ते समय उस ग्रह की स्थिति — उसकी राशि, भाव, दृष्टि और दशा — सबसे अधिक महत्व रखती है।

मेष राशि में कौन-से नक्षत्र आते हैं?

अश्विनी, भरणी, कृत्तिका (पाद 1)। एक राशि 30 अंश की होती है और उसमें सवा दो नक्षत्र आते हैं, इसलिए नक्षत्र ग्रह की स्थिति राशि से कहीं अधिक सूक्ष्मता से तय करता है और विंशोत्तरी दशा का क्रम भी वही निर्धारित करता है।

मेरी वैदिक राशि पाश्चात्य राशि से अलग क्यों है?

क्योंकि दोनों राशिचक्रों का आरम्भ-बिन्दु अलग है। सायन राशिचक्र वसन्त सम्पात से आरम्भ होता है; वैदिक ज्योतिष का निरयण राशिचक्र नक्षत्रों पर स्थिर है। दोनों के बीच लगभग 24 अंश का अन्तर आ चुका है, इसलिए पाश्चात्य राशि के पहले तीन सप्ताह में जन्मे लोग प्रायः पिछली राशि में आते हैं।

राशिफल सूर्य राशि पर आधारित है या चन्द्र राशि पर?

चन्द्र राशि पर। भारतीय और नेपाली प्रयोग में आपकी राशि वही है जिसमें जन्म के समय चन्द्रमा था। दैनिक राशिफल उसी राशि से गिने गए गोचर चन्द्रमा को पढ़ता है, इसीलिए चन्द्रमा के चलने के साथ हर एक-दो दिन में भविष्यवाणी बदलती है।

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