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स्वामी ग्रह: मंगल

मृगशिरा नक्षत्र

संक्षेप में

मृगशिरा नक्षत्र क्या है?

मृगशिरा 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 53°20′–66°40′ में फैला है और वृषभ, मिथुन में पड़ता है। इसके स्वामी मंगल हैं, गण देव, नाड़ी मध्य और योनि सर्प है।

खोज का नक्षत्र। जिज्ञासा, बेचैनी और उस वस्तु की खोज से जुड़ा जो पहुँच से थोड़ी बाहर है।

स्वामी ग्रह
मंगल
राशिचक्र में विस्तार
53°20′ – 66°40′
पाद
4 × 3°20′
गण
देव
नाड़ी
मध्य
योनि
सर्प
प्रतीक
मृग-मस्तक
देवता
सोम
विंशोत्तरी दशा
मंगल · 7 वर्ष

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मृगशिरा नक्षत्र क्या है?

मृगशिरा 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 53°20′–66°40′ में फैला है और वृषभ, मिथुन में पड़ता है। इसके स्वामी मंगल हैं, गण देव, नाड़ी मध्य और योनि सर्प है।

मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?

मंगल। इसी स्वामित्व के कारण मृगशिरा में जन्मे व्यक्ति का जीवन मंगल की महादशा से आरम्भ होता है, जो विंशोत्तरी चक्र में 7 वर्ष चलती है।

मृगशिरा किस राशि में पड़ता है?

वृषभ, मिथुन। नक्षत्र 13°20′ का होता है और राशि 30° की, इसलिए अधिकांश नक्षत्र किसी एक राशि में पूरी तरह न बैठकर सीमा पार करते हैं।

मृगशिरा का गण और नाड़ी क्या है?

मृगशिरा का गण देव और नाड़ी मध्य है। दोनों अष्टकूट मिलान में प्रयोग होते हैं — गण छह अंकों का और नाड़ी आठ अंकों की।

मृगशिरा की योनि क्या है?

सर्प। योनि कूट दो जन्म नक्षत्रों को दिए गए पशुओं की तुलना करता है और 36 में से चार अंकों का है।

मृगशिरा में कितने पाद होते हैं?

चार, हर नक्षत्र की तरह। हर पाद 3°20′ का होता है, जिससे पूरे राशिचक्र में 108 पाद बनते हैं।

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