प्रेम और सम्बन्ध
3.5आपको निकटता और एकांत दोनों बराबर चाहिए, जो सामने वाला समझ नहीं पाएगा। साफ़ बता दें।
15 मई – 14 जून
वृषभ राशि, रविवार, 25 अक्टूबर 2026: 5 में से 4.5 — चन्द्रमा मीन राशि (रेवती नक्षत्र) में, वृषभ से एकादश भाव में।
चन्द्रमा ग्यारहवें भाव में पहुँचा है — उसकी सर्वोत्तम स्थिति। लाभ परिश्रम से नहीं, सम्पर्कों से आएगा। बहुत पहले की माँगी कोई चीज़ चुपचाप पूरी होती है।
चन्द्रमा के नक्षत्र पर बुध का शासन है, जो वाणी, व्यापार और कागज़ी काम को गति देता है। संदेश लिखें, बिल भेजें, फ़ोन कर लें।
आपको निकटता और एकांत दोनों बराबर चाहिए, जो सामने वाला समझ नहीं पाएगा। साफ़ बता दें।
योजना के लिए अच्छा, शुरुआत के लिए नहीं। आज मसौदा बनाएँ, भेजें तब जब गति बने।
बचत और दर पर मोलभाव के लिए अनुकूल समय। माँग लें — उत्तर 'हाँ' होने की सम्भावना अधिक है।
नींद सुधरेगी और पाचन ठीक बैठेगा। थोड़ा ज़ोर लगाएँ — शरीर में अभी क्षमता है।
सुझाया गया उपाय
उगते सूर्य को जल अर्पित करें और दिन का पहला घंटा स्क्रीन से दूर रखें।
वृषभ थामे रखती है। शुक्र के स्वामित्व वाली यह स्थिर पृथ्वी राशि संचय करती है — धन, सुख, निष्ठा, और शिकायतें भी — और इनमें से कुछ भी सहज नहीं छोड़ती। मूल्य की इसकी परख वास्तव में अच्छी होती है, इसीलिए संसाधन वृषभ के हाथ में सौंपे जाते हैं। कठिनाई ठीक-ठीक हठ नहीं है; बात यह है कि रास्ता बदलना उन्हें पहले से कमाई हुई चीज़ खोने जैसा लगता है। दबाव के बजाय समय मिले, तो वे चल पड़ते हैं।
वृषभ राशि, जिसे अंग्रेज़ी में Taurus कहते हैं, निरयण राशिचक्र में बैल की राशि है और इसके स्वामी शुक्र हैं। यह पृथ्वी तत्व की स्थिर राशि है — वैदिक ज्योतिष में यही जोड़ी बताती है कि कोई राशि काम आरम्भ करती है, उसे थामे रखती है, या उसके अनुसार ढल जाती है।
निरयण राशिचक्र में सूर्य लगभग 15 मई से 14 जून तक वृषभ में रहता है। पाश्चात्य ज्योतिष सायन राशिचक्र मानता है, जिसमें Taurus की अवधि 20 अप्रैल – 20 मई है। दोनों में लगभग 24 अंश का अन्तर है — यही अयनांश है — और इसी कारण आपकी वैदिक राशि प्रायः पाश्चात्य राशि से एक पहले पड़ती है।
वृषभ में कृत्तिका (पाद 2–4), रोहिणी, मृगशिरा (पाद 1–2) आते हैं। प्रत्येक राशि 30 अंश की होती है और उसमें सवा दो नक्षत्र समाते हैं, इसलिए नक्षत्र किसी ग्रह की स्थिति राशि से कहीं अधिक सूक्ष्मता से बताता है — और आपकी विंशोत्तरी दशा का क्रम भी नक्षत्र से ही तय होता है।
भारतीय और नेपाली परम्परा में आपकी राशि चन्द्र राशि होती है, अर्थात् जन्म के समय चन्द्रमा जिस राशि में था — सूर्य नहीं। मन का कारक चन्द्रमा है, और दैनिक राशिफल वास्तव में आपकी राशि से गिने गए चन्द्रमा के दैनिक गोचर को ही पढ़ता है।
परम्परागत मिलान में वृषभ को कन्या, मकर के साथ सहज धरातल मिलता है, जहाँ तत्व और स्वामी ग्रह सहमत होते हैं। वृश्चिक अधिक परिश्रम माँगती है — असंगति नहीं, बल्कि गति और प्राथमिकता का अन्तर, जिसे मान लेने के बजाय कह देना पड़ता है। अष्टकूट गुण मिलान केवल राशि नहीं, आठ कारक देखता है, इसलिए राशि-से-राशि अनुकूलता को अन्तिम निर्णय नहीं, पहला संकेत मानें। वृषभ राशि मिलान — वृषभ की किन राशियों से पटती है
विधि
यह भविष्यवाणी जिन निरयण स्थितियों से निकाली गई है, वे नीचे दी गई हैं। इनमें से हर एक को आप किसी भी पंचांग से मिला सकते हैं।
निरयण राशिचक्र में सूर्य प्रतिवर्ष लगभग 15 मई से 14 जून तक वृषभ में गोचर करता है। पाश्चात्य सायन राशिचक्र में Taurus की अवधि 20 अप्रैल – 20 मई है। लगभग तीन सप्ताह का यह अन्तर अयनांश है — नक्षत्र-आधारित और सम्पात-आधारित राशिचक्रों के बीच संचित अयन-गति।
वृषभ के स्वामी शुक्र हैं। वृषभ की कुण्डली पढ़ते समय उस ग्रह की स्थिति — उसकी राशि, भाव, दृष्टि और दशा — सबसे अधिक महत्व रखती है।
कृत्तिका (पाद 2–4), रोहिणी, मृगशिरा (पाद 1–2)। एक राशि 30 अंश की होती है और उसमें सवा दो नक्षत्र आते हैं, इसलिए नक्षत्र ग्रह की स्थिति राशि से कहीं अधिक सूक्ष्मता से तय करता है और विंशोत्तरी दशा का क्रम भी वही निर्धारित करता है।
क्योंकि दोनों राशिचक्रों का आरम्भ-बिन्दु अलग है। सायन राशिचक्र वसन्त सम्पात से आरम्भ होता है; वैदिक ज्योतिष का निरयण राशिचक्र नक्षत्रों पर स्थिर है। दोनों के बीच लगभग 24 अंश का अन्तर आ चुका है, इसलिए पाश्चात्य राशि के पहले तीन सप्ताह में जन्मे लोग प्रायः पिछली राशि में आते हैं।
चन्द्र राशि पर। भारतीय और नेपाली प्रयोग में आपकी राशि वही है जिसमें जन्म के समय चन्द्रमा था। दैनिक राशिफल उसी राशि से गिने गए गोचर चन्द्रमा को पढ़ता है, इसीलिए चन्द्रमा के चलने के साथ हर एक-दो दिन में भविष्यवाणी बदलती है।