स्वामी ग्रह: राहु
स्वाति नक्षत्र
संक्षेप में
स्वाति नक्षत्र क्या है?
स्वाति 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 186°40′–200°00′ में फैला है और तुला में पड़ता है। इसके स्वामी राहु हैं, गण देव, नाड़ी अन्त्य और योनि महिष है।
वायु के अधीन। स्वतन्त्रता, लचीलेपन और उस गति से जुड़ा जिसे बाँधा नहीं जा सकता।
- स्वामी ग्रह
- राहु
- राशिचक्र में विस्तार
- 186°40′ – 200°00′
- राशि
- तुला
- पाद
- 4 × 3°20′
- गण
- देव
- नाड़ी
- अन्त्य
- योनि
- महिष
- प्रतीक
- वायु में हिलता अंकुर
- देवता
- वायु
- विंशोत्तरी दशा
- राहु · 18 वर्ष
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्वाति नक्षत्र क्या है?
स्वाति 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 186°40′–200°00′ में फैला है और तुला में पड़ता है। इसके स्वामी राहु हैं, गण देव, नाड़ी अन्त्य और योनि महिष है।
स्वाति नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
राहु। इसी स्वामित्व के कारण स्वाति में जन्मे व्यक्ति का जीवन राहु की महादशा से आरम्भ होता है, जो विंशोत्तरी चक्र में 18 वर्ष चलती है।
स्वाति किस राशि में पड़ता है?
तुला। नक्षत्र 13°20′ का होता है और राशि 30° की, इसलिए अधिकांश नक्षत्र किसी एक राशि में पूरी तरह न बैठकर सीमा पार करते हैं।
स्वाति का गण और नाड़ी क्या है?
स्वाति का गण देव और नाड़ी अन्त्य है। दोनों अष्टकूट मिलान में प्रयोग होते हैं — गण छह अंकों का और नाड़ी आठ अंकों की।
स्वाति की योनि क्या है?
महिष। योनि कूट दो जन्म नक्षत्रों को दिए गए पशुओं की तुलना करता है और 36 में से चार अंकों का है।
स्वाति में कितने पाद होते हैं?
चार, हर नक्षत्र की तरह। हर पाद 3°20′ का होता है, जिससे पूरे राशिचक्र में 108 पाद बनते हैं।