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स्वामी ग्रह: राहु

शतभिषा नक्षत्र

संक्षेप में

शतभिषा नक्षत्र क्या है?

शतभिषा 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 306°40′–320°00′ में फैला है और कुम्भ में पड़ता है। इसके स्वामी राहु हैं, गण राक्षस, नाड़ी आदि और योनि अश्व है।

सौ वैद्य। चिकित्सा, अनुसन्धान और उस एकान्तप्रिय स्वभाव से जुड़ा जो बिना देखे गए सर्वोत्तम काम करता है।

स्वामी ग्रह
राहु
राशिचक्र में विस्तार
306°40′ – 320°00′
राशि
कुम्भ
पाद
4 × 3°20′
गण
राक्षस
नाड़ी
आदि
योनि
अश्व
प्रतीक
रिक्त वृत्त
देवता
वरुण
विंशोत्तरी दशा
राहु · 18 वर्ष

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शतभिषा नक्षत्र क्या है?

शतभिषा 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 306°40′–320°00′ में फैला है और कुम्भ में पड़ता है। इसके स्वामी राहु हैं, गण राक्षस, नाड़ी आदि और योनि अश्व है।

शतभिषा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?

राहु। इसी स्वामित्व के कारण शतभिषा में जन्मे व्यक्ति का जीवन राहु की महादशा से आरम्भ होता है, जो विंशोत्तरी चक्र में 18 वर्ष चलती है।

शतभिषा किस राशि में पड़ता है?

कुम्भ। नक्षत्र 13°20′ का होता है और राशि 30° की, इसलिए अधिकांश नक्षत्र किसी एक राशि में पूरी तरह न बैठकर सीमा पार करते हैं।

शतभिषा का गण और नाड़ी क्या है?

शतभिषा का गण राक्षस और नाड़ी आदि है। दोनों अष्टकूट मिलान में प्रयोग होते हैं — गण छह अंकों का और नाड़ी आठ अंकों की।

शतभिषा की योनि क्या है?

अश्व। योनि कूट दो जन्म नक्षत्रों को दिए गए पशुओं की तुलना करता है और 36 में से चार अंकों का है।

शतभिषा में कितने पाद होते हैं?

चार, हर नक्षत्र की तरह। हर पाद 3°20′ का होता है, जिससे पूरे राशिचक्र में 108 पाद बनते हैं।

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