स्वामी ग्रह: शनि
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र
संक्षेप में
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र क्या है?
उत्तरा भाद्रपद 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 333°20′–346°40′ में फैला है और मीन में पड़ता है। इसके स्वामी शनि हैं, गण मनुष्य, नाड़ी मध्य और योनि गौ है।
गहराई। धैर्य, संयम और उस स्थिर प्रज्ञा से जुड़ा जिसे घोषित करने की आवश्यकता नहीं।
- स्वामी ग्रह
- शनि
- राशिचक्र में विस्तार
- 333°20′ – 346°40′
- राशि
- मीन
- पाद
- 4 × 3°20′
- गण
- मनुष्य
- नाड़ी
- मध्य
- योनि
- गौ
- प्रतीक
- अर्थी का पिछला भाग
- देवता
- अहिर्बुध्न्य
- विंशोत्तरी दशा
- शनि · 19 वर्ष
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र क्या है?
उत्तरा भाद्रपद 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 333°20′–346°40′ में फैला है और मीन में पड़ता है। इसके स्वामी शनि हैं, गण मनुष्य, नाड़ी मध्य और योनि गौ है।
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
शनि। इसी स्वामित्व के कारण उत्तरा भाद्रपद में जन्मे व्यक्ति का जीवन शनि की महादशा से आरम्भ होता है, जो विंशोत्तरी चक्र में 19 वर्ष चलती है।
उत्तरा भाद्रपद किस राशि में पड़ता है?
मीन। नक्षत्र 13°20′ का होता है और राशि 30° की, इसलिए अधिकांश नक्षत्र किसी एक राशि में पूरी तरह न बैठकर सीमा पार करते हैं।
उत्तरा भाद्रपद का गण और नाड़ी क्या है?
उत्तरा भाद्रपद का गण मनुष्य और नाड़ी मध्य है। दोनों अष्टकूट मिलान में प्रयोग होते हैं — गण छह अंकों का और नाड़ी आठ अंकों की।
उत्तरा भाद्रपद की योनि क्या है?
गौ। योनि कूट दो जन्म नक्षत्रों को दिए गए पशुओं की तुलना करता है और 36 में से चार अंकों का है।
उत्तरा भाद्रपद में कितने पाद होते हैं?
चार, हर नक्षत्र की तरह। हर पाद 3°20′ का होता है, जिससे पूरे राशिचक्र में 108 पाद बनते हैं।