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15 मार्च – 13 अप्रैल

मीन राशि

संक्षेप में

3.5/ 5 · समग्र

मीन राशि, रविवार, 25 अक्टूबर 2026: 5 में से 3.5 — चन्द्रमा मीन राशि (रेवती नक्षत्र) में, मीन से प्रथम भाव में।

चन्द्रमा आपकी ही राशि से गोचर कर रहा है, इसलिए आज आपका मन ही हर काम का रंग तय करेगा। तर्क से ज़्यादा भावना हावी रहेगी। दिन को हल्का रखें।

चन्द्रमा के नक्षत्र पर बुध का शासन है, जो वाणी, व्यापार और कागज़ी काम को गति देता है। संदेश लिखें, बिल भेजें, फ़ोन कर लें।

विस्तार से

प्रेम और सम्बन्ध

3.5

छोटी-छोटी चिढ़ें किसी बड़ी अनकही बात की जगह ले रही हैं। असली बात कहें या छोटी बातें छोड़ दें।

करियर और कार्यक्षेत्र

3

सहकर्मी सहयोगी भी हैं और धीमे भी। इस देरी को अपने वादों में जोड़कर चलें।

धन और वित्त

3

एक नियोजित खर्च सही है, दूसरा नहीं। अंतर बस इतना है कि निर्णय आज से पहले लिया गया था या नहीं।

स्वास्थ्य और ऊर्जा

3

ऊर्जा लगातार नहीं, झोंकों में मिलेगी। उन्हीं शिखरों के अनुसार दिन बाँटें।

शुभ अंक
12
शुभ रंग
मरून
शुभ समय
15:00 – 16:30

सुझाया गया उपाय

उगते सूर्य को जल अर्पित करें और दिन का पहला घंटा स्क्रीन से दूर रखें।

मीन राशि का परिचय

मीन सीमाएँ घोल देती है। गुरु के स्वामित्व वाली यह द्विस्वभाव जल राशि कल्पनाशील है, असामान्य रूप से करुण है, और वातावरण के प्रति इस हद तक भेद्य कि यही उसका वरदान भी है और उसकी थकान भी। मीन के लोग वह समझ लेते हैं जो कहा नहीं गया। वे ही सबसे अधिक सम्भावना रखते हैं कि अपने पास जो है उससे अधिक दे दें और उसे 'कुछ नहीं' कह दें। मीन को कठोरता नहीं, ढाँचा चाहिए — कुछ ऐसा जो आकार थामे रहे जब तक भावना अपना काम करती है।

मीन राशि, जिसे अंग्रेज़ी में Pisces कहते हैं, निरयण राशिचक्र में मछलियाँ की राशि है और इसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं। यह जल तत्व की द्विस्वभाव राशि है — वैदिक ज्योतिष में यही जोड़ी बताती है कि कोई राशि काम आरम्भ करती है, उसे थामे रखती है, या उसके अनुसार ढल जाती है।

निरयण राशिचक्र में सूर्य लगभग 15 मार्च से 13 अप्रैल तक मीन में रहता है। पाश्चात्य ज्योतिष सायन राशिचक्र मानता है, जिसमें Pisces की अवधि 19 फ़रवरी – 20 मार्च है। दोनों में लगभग 24 अंश का अन्तर है — यही अयनांश है — और इसी कारण आपकी वैदिक राशि प्रायः पाश्चात्य राशि से एक पहले पड़ती है।

मीन में पूर्वा भाद्रपद (पाद 4), उत्तरा भाद्रपद, रेवती आते हैं। प्रत्येक राशि 30 अंश की होती है और उसमें सवा दो नक्षत्र समाते हैं, इसलिए नक्षत्र किसी ग्रह की स्थिति राशि से कहीं अधिक सूक्ष्मता से बताता है — और आपकी विंशोत्तरी दशा का क्रम भी नक्षत्र से ही तय होता है।

भारतीय और नेपाली परम्परा में आपकी राशि चन्द्र राशि होती है, अर्थात् जन्म के समय चन्द्रमा जिस राशि में था — सूर्य नहीं। मन का कारक चन्द्रमा है, और दैनिक राशिफल वास्तव में आपकी राशि से गिने गए चन्द्रमा के दैनिक गोचर को ही पढ़ता है।

परम्परागत मिलान में मीन को कर्क, वृश्चिक के साथ सहज धरातल मिलता है, जहाँ तत्व और स्वामी ग्रह सहमत होते हैं। कन्या अधिक परिश्रम माँगती है — असंगति नहीं, बल्कि गति और प्राथमिकता का अन्तर, जिसे मान लेने के बजाय कह देना पड़ता है। अष्टकूट गुण मिलान केवल राशि नहीं, आठ कारक देखता है, इसलिए राशि-से-राशि अनुकूलता को अन्तिम निर्णय नहीं, पहला संकेत मानें। मीन राशि मिलान — मीन की किन राशियों से पटती है

स्वामी ग्रह
गुरु (बृहस्पति)
तत्व
जल
स्वभाव
द्विस्वभाव
प्रतीक
मछलियाँ
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद (पाद 4), उत्तरा भाद्रपद, रेवती
सूर्य का इस राशि में गोचर
15 मार्च – 13 अप्रैल
पाश्चात्य (सायन) तिथियाँ
19 फ़रवरी – 20 मार्च
रत्न
पुखराज
शुभ दिन
गुरुवार

नक्षत्र

विधि

यह राशिफल किस गणना पर आधारित है

यह भविष्यवाणी जिन निरयण स्थितियों से निकाली गई है, वे नीचे दी गई हैं। इनमें से हर एक को आप किसी भी पंचांग से मिला सकते हैं।

चन्द्रमा
मीन
सूर्य
तुला
चन्द्र नक्षत्र
रेवती · पाद 2
तिथि
चतुर्दशी · शुक्ल पक्ष
चन्द्र गोचर
प्रथम भाव (आपकी राशि से)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीन राशि की तिथियाँ क्या हैं?

निरयण राशिचक्र में सूर्य प्रतिवर्ष लगभग 15 मार्च से 13 अप्रैल तक मीन में गोचर करता है। पाश्चात्य सायन राशिचक्र में Pisces की अवधि 19 फ़रवरी – 20 मार्च है। लगभग तीन सप्ताह का यह अन्तर अयनांश है — नक्षत्र-आधारित और सम्पात-आधारित राशिचक्रों के बीच संचित अयन-गति।

मीन राशि का स्वामी ग्रह कौन है?

मीन के स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं। मीन की कुण्डली पढ़ते समय उस ग्रह की स्थिति — उसकी राशि, भाव, दृष्टि और दशा — सबसे अधिक महत्व रखती है।

मीन राशि में कौन-से नक्षत्र आते हैं?

पूर्वा भाद्रपद (पाद 4), उत्तरा भाद्रपद, रेवती। एक राशि 30 अंश की होती है और उसमें सवा दो नक्षत्र आते हैं, इसलिए नक्षत्र ग्रह की स्थिति राशि से कहीं अधिक सूक्ष्मता से तय करता है और विंशोत्तरी दशा का क्रम भी वही निर्धारित करता है।

मेरी वैदिक राशि पाश्चात्य राशि से अलग क्यों है?

क्योंकि दोनों राशिचक्रों का आरम्भ-बिन्दु अलग है। सायन राशिचक्र वसन्त सम्पात से आरम्भ होता है; वैदिक ज्योतिष का निरयण राशिचक्र नक्षत्रों पर स्थिर है। दोनों के बीच लगभग 24 अंश का अन्तर आ चुका है, इसलिए पाश्चात्य राशि के पहले तीन सप्ताह में जन्मे लोग प्रायः पिछली राशि में आते हैं।

राशिफल सूर्य राशि पर आधारित है या चन्द्र राशि पर?

चन्द्र राशि पर। भारतीय और नेपाली प्रयोग में आपकी राशि वही है जिसमें जन्म के समय चन्द्रमा था। दैनिक राशिफल उसी राशि से गिने गए गोचर चन्द्रमा को पढ़ता है, इसीलिए चन्द्रमा के चलने के साथ हर एक-दो दिन में भविष्यवाणी बदलती है।

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