स्वामी ग्रह: गुरु (बृहस्पति)
विशाखा नक्षत्र
संक्षेप में
विशाखा नक्षत्र क्या है?
विशाखा 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 200°00′–213°20′ में फैला है और तुला, वृश्चिक में पड़ता है। इसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गण राक्षस, नाड़ी अन्त्य और योनि व्याघ्र है।
दृढ़ प्रयास का नक्षत्र। लम्बे समय तक थामी गई महत्वाकांक्षा और देर से पर अवश्य प्राप्त लक्ष्य से जुड़ा।
- स्वामी ग्रह
- गुरु (बृहस्पति)
- राशिचक्र में विस्तार
- 200°00′ – 213°20′
- पाद
- 4 × 3°20′
- गण
- राक्षस
- नाड़ी
- अन्त्य
- योनि
- व्याघ्र
- प्रतीक
- विजय-तोरण
- देवता
- इन्द्र और अग्नि
- विंशोत्तरी दशा
- गुरु (बृहस्पति) · 16 वर्ष
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विशाखा नक्षत्र क्या है?
विशाखा 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 200°00′–213°20′ में फैला है और तुला, वृश्चिक में पड़ता है। इसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गण राक्षस, नाड़ी अन्त्य और योनि व्याघ्र है।
विशाखा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
गुरु (बृहस्पति)। इसी स्वामित्व के कारण विशाखा में जन्मे व्यक्ति का जीवन गुरु (बृहस्पति) की महादशा से आरम्भ होता है, जो विंशोत्तरी चक्र में 16 वर्ष चलती है।
विशाखा किस राशि में पड़ता है?
तुला, वृश्चिक। नक्षत्र 13°20′ का होता है और राशि 30° की, इसलिए अधिकांश नक्षत्र किसी एक राशि में पूरी तरह न बैठकर सीमा पार करते हैं।
विशाखा का गण और नाड़ी क्या है?
विशाखा का गण राक्षस और नाड़ी अन्त्य है। दोनों अष्टकूट मिलान में प्रयोग होते हैं — गण छह अंकों का और नाड़ी आठ अंकों की।
विशाखा की योनि क्या है?
व्याघ्र। योनि कूट दो जन्म नक्षत्रों को दिए गए पशुओं की तुलना करता है और 36 में से चार अंकों का है।
विशाखा में कितने पाद होते हैं?
चार, हर नक्षत्र की तरह। हर पाद 3°20′ का होता है, जिससे पूरे राशिचक्र में 108 पाद बनते हैं।