स्वामी ग्रह: चन्द्रमा
रोहिणी नक्षत्र
संक्षेप में
रोहिणी नक्षत्र क्या है?
रोहिणी 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 40°00′–53°20′ में फैला है और वृषभ में पड़ता है। इसके स्वामी चन्द्रमा हैं, गण मनुष्य, नाड़ी अन्त्य और योनि सर्प है।
चन्द्रमा का प्रिय नक्षत्र। वृद्धि, उर्वरता, सौन्दर्य और भौतिक समृद्धि से जुड़ा — यहाँ बोया गया प्रायः जड़ पकड़ता है।
- स्वामी ग्रह
- चन्द्रमा
- राशिचक्र में विस्तार
- 40°00′ – 53°20′
- राशि
- वृषभ
- पाद
- 4 × 3°20′
- गण
- मनुष्य
- नाड़ी
- अन्त्य
- योनि
- सर्प
- प्रतीक
- बैलगाड़ी
- देवता
- ब्रह्मा
- विंशोत्तरी दशा
- चन्द्रमा · 10 वर्ष
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रोहिणी नक्षत्र क्या है?
रोहिणी 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 40°00′–53°20′ में फैला है और वृषभ में पड़ता है। इसके स्वामी चन्द्रमा हैं, गण मनुष्य, नाड़ी अन्त्य और योनि सर्प है।
रोहिणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
चन्द्रमा। इसी स्वामित्व के कारण रोहिणी में जन्मे व्यक्ति का जीवन चन्द्रमा की महादशा से आरम्भ होता है, जो विंशोत्तरी चक्र में 10 वर्ष चलती है।
रोहिणी किस राशि में पड़ता है?
वृषभ। नक्षत्र 13°20′ का होता है और राशि 30° की, इसलिए अधिकांश नक्षत्र किसी एक राशि में पूरी तरह न बैठकर सीमा पार करते हैं।
रोहिणी का गण और नाड़ी क्या है?
रोहिणी का गण मनुष्य और नाड़ी अन्त्य है। दोनों अष्टकूट मिलान में प्रयोग होते हैं — गण छह अंकों का और नाड़ी आठ अंकों की।
रोहिणी की योनि क्या है?
सर्प। योनि कूट दो जन्म नक्षत्रों को दिए गए पशुओं की तुलना करता है और 36 में से चार अंकों का है।
रोहिणी में कितने पाद होते हैं?
चार, हर नक्षत्र की तरह। हर पाद 3°20′ का होता है, जिससे पूरे राशिचक्र में 108 पाद बनते हैं।