स्वामी ग्रह: चन्द्रमा
श्रवण नक्षत्र
संक्षेप में
श्रवण नक्षत्र क्या है?
श्रवण 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 280°00′–293°20′ में फैला है और मकर में पड़ता है। इसके स्वामी चन्द्रमा हैं, गण देव, नाड़ी अन्त्य और योनि वानर है।
श्रवण का नक्षत्र। सुनकर सीखने, विद्वत्ता और ज्ञान के हस्तान्तरण से जुड़ा।
- स्वामी ग्रह
- चन्द्रमा
- राशिचक्र में विस्तार
- 280°00′ – 293°20′
- राशि
- मकर
- पाद
- 4 × 3°20′
- गण
- देव
- नाड़ी
- अन्त्य
- योनि
- वानर
- प्रतीक
- कान
- देवता
- विष्णु
- विंशोत्तरी दशा
- चन्द्रमा · 10 वर्ष
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रवण नक्षत्र क्या है?
श्रवण 27 नक्षत्रों में से एक है, जो निरयण राशिचक्र के 280°00′–293°20′ में फैला है और मकर में पड़ता है। इसके स्वामी चन्द्रमा हैं, गण देव, नाड़ी अन्त्य और योनि वानर है।
श्रवण नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
चन्द्रमा। इसी स्वामित्व के कारण श्रवण में जन्मे व्यक्ति का जीवन चन्द्रमा की महादशा से आरम्भ होता है, जो विंशोत्तरी चक्र में 10 वर्ष चलती है।
श्रवण किस राशि में पड़ता है?
मकर। नक्षत्र 13°20′ का होता है और राशि 30° की, इसलिए अधिकांश नक्षत्र किसी एक राशि में पूरी तरह न बैठकर सीमा पार करते हैं।
श्रवण का गण और नाड़ी क्या है?
श्रवण का गण देव और नाड़ी अन्त्य है। दोनों अष्टकूट मिलान में प्रयोग होते हैं — गण छह अंकों का और नाड़ी आठ अंकों की।
श्रवण की योनि क्या है?
वानर। योनि कूट दो जन्म नक्षत्रों को दिए गए पशुओं की तुलना करता है और 36 में से चार अंकों का है।
श्रवण में कितने पाद होते हैं?
चार, हर नक्षत्र की तरह। हर पाद 3°20′ का होता है, जिससे पूरे राशिचक्र में 108 पाद बनते हैं।