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13 फ़रवरी – 14 मार्च

कुम्भ राशि

संक्षेप में

2.5/ 5 · समग्र

कुम्भ राशि, रविवार, 25 अक्टूबर 2026: 5 में से 2.5 — चन्द्रमा मीन राशि (रेवती नक्षत्र) में, कुम्भ से द्वितीय भाव में।

चन्द्रमा दूसरे भाव में है, ध्यान धन, परिवार और वाणी की ओर जाएगा। आज कही हुई बात दूर तक जाती है — शब्द सोच-समझकर चुनें।

चन्द्रमा के नक्षत्र पर बुध का शासन है, जो वाणी, व्यापार और कागज़ी काम को गति देता है। संदेश लिखें, बिल भेजें, फ़ोन कर लें।

विस्तार से

प्रेम और सम्बन्ध

3

आपको निकटता और एकांत दोनों बराबर चाहिए, जो सामने वाला समझ नहीं पाएगा। साफ़ बता दें।

करियर और कार्यक्षेत्र

2.5

टकराव लोगों से नहीं, प्रक्रिया से होगा। संशोधन आएँगे — उन्हें अपनी योग्यता पर टिप्पणी न समझें।

धन और वित्त

3

आय और व्यय लगभग बराबर रहेंगे। स्थिति सुधारने के बजाय सँभालकर रखें।

स्वास्थ्य और ऊर्जा

3

ऊर्जा लगातार नहीं, झोंकों में मिलेगी। उन्हीं शिखरों के अनुसार दिन बाँटें।

शुभ अंक
17
शुभ रंग
पन्ना हरा
शुभ समय
07:30 – 09:00

सुझाया गया उपाय

पहला भोजन करने से पहले पक्षियों या बेसहारा पशुओं को खिलाएँ।

कुम्भ राशि का परिचय

कुम्भ अलग खड़ी रहती है। शनि के स्वामित्व वाली यह स्थिर वायु राशि व्यवस्थित है, अमूर्त रूप में मानवीय है, और प्रायः कमरे में वही व्यक्ति होती है जिसे सम्मिलित होने में सबसे कम रुचि है। कुम्भ के लोग जो है उससे अधिक जो हो सकता है उसकी ओर खिंचते हैं, और अपनी बात उस बिन्दु से बहुत आगे तक थामे रखते हैं जहाँ बाकी समझौता कर चुके होते हैं। शक्ति है विचारों की सच्ची स्वतन्त्रता; कठिनाई यह कि सिद्धान्त कभी-कभी लोगों को दूर रखने का तरीका बन जाता है।

कुम्भ राशि, जिसे अंग्रेज़ी में Aquarius कहते हैं, निरयण राशिचक्र में कुम्भ (जल-वाहक) की राशि है और इसके स्वामी शनि हैं। यह वायु तत्व की स्थिर राशि है — वैदिक ज्योतिष में यही जोड़ी बताती है कि कोई राशि काम आरम्भ करती है, उसे थामे रखती है, या उसके अनुसार ढल जाती है।

निरयण राशिचक्र में सूर्य लगभग 13 फ़रवरी से 14 मार्च तक कुम्भ में रहता है। पाश्चात्य ज्योतिष सायन राशिचक्र मानता है, जिसमें Aquarius की अवधि 20 जनवरी – 18 फ़रवरी है। दोनों में लगभग 24 अंश का अन्तर है — यही अयनांश है — और इसी कारण आपकी वैदिक राशि प्रायः पाश्चात्य राशि से एक पहले पड़ती है।

कुम्भ में धनिष्ठा (पाद 3–4), शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद (पाद 1–3) आते हैं। प्रत्येक राशि 30 अंश की होती है और उसमें सवा दो नक्षत्र समाते हैं, इसलिए नक्षत्र किसी ग्रह की स्थिति राशि से कहीं अधिक सूक्ष्मता से बताता है — और आपकी विंशोत्तरी दशा का क्रम भी नक्षत्र से ही तय होता है।

भारतीय और नेपाली परम्परा में आपकी राशि चन्द्र राशि होती है, अर्थात् जन्म के समय चन्द्रमा जिस राशि में था — सूर्य नहीं। मन का कारक चन्द्रमा है, और दैनिक राशिफल वास्तव में आपकी राशि से गिने गए चन्द्रमा के दैनिक गोचर को ही पढ़ता है।

परम्परागत मिलान में कुम्भ को मिथुन, तुला के साथ सहज धरातल मिलता है, जहाँ तत्व और स्वामी ग्रह सहमत होते हैं। सिंह अधिक परिश्रम माँगती है — असंगति नहीं, बल्कि गति और प्राथमिकता का अन्तर, जिसे मान लेने के बजाय कह देना पड़ता है। अष्टकूट गुण मिलान केवल राशि नहीं, आठ कारक देखता है, इसलिए राशि-से-राशि अनुकूलता को अन्तिम निर्णय नहीं, पहला संकेत मानें। कुम्भ राशि मिलान — कुम्भ की किन राशियों से पटती है

स्वामी ग्रह
शनि
तत्व
वायु
स्वभाव
स्थिर
प्रतीक
कुम्भ (जल-वाहक)
नक्षत्र
धनिष्ठा (पाद 3–4), शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद (पाद 1–3)
सूर्य का इस राशि में गोचर
13 फ़रवरी – 14 मार्च
पाश्चात्य (सायन) तिथियाँ
20 जनवरी – 18 फ़रवरी
रत्न
नीलम
शुभ दिन
शनिवार

नक्षत्र

विधि

यह राशिफल किस गणना पर आधारित है

यह भविष्यवाणी जिन निरयण स्थितियों से निकाली गई है, वे नीचे दी गई हैं। इनमें से हर एक को आप किसी भी पंचांग से मिला सकते हैं।

चन्द्रमा
मीन
सूर्य
तुला
चन्द्र नक्षत्र
रेवती · पाद 2
तिथि
चतुर्दशी · शुक्ल पक्ष
चन्द्र गोचर
द्वितीय भाव (आपकी राशि से)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुम्भ राशि की तिथियाँ क्या हैं?

निरयण राशिचक्र में सूर्य प्रतिवर्ष लगभग 13 फ़रवरी से 14 मार्च तक कुम्भ में गोचर करता है। पाश्चात्य सायन राशिचक्र में Aquarius की अवधि 20 जनवरी – 18 फ़रवरी है। लगभग तीन सप्ताह का यह अन्तर अयनांश है — नक्षत्र-आधारित और सम्पात-आधारित राशिचक्रों के बीच संचित अयन-गति।

कुम्भ राशि का स्वामी ग्रह कौन है?

कुम्भ के स्वामी शनि हैं। कुम्भ की कुण्डली पढ़ते समय उस ग्रह की स्थिति — उसकी राशि, भाव, दृष्टि और दशा — सबसे अधिक महत्व रखती है।

कुम्भ राशि में कौन-से नक्षत्र आते हैं?

धनिष्ठा (पाद 3–4), शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद (पाद 1–3)। एक राशि 30 अंश की होती है और उसमें सवा दो नक्षत्र आते हैं, इसलिए नक्षत्र ग्रह की स्थिति राशि से कहीं अधिक सूक्ष्मता से तय करता है और विंशोत्तरी दशा का क्रम भी वही निर्धारित करता है।

मेरी वैदिक राशि पाश्चात्य राशि से अलग क्यों है?

क्योंकि दोनों राशिचक्रों का आरम्भ-बिन्दु अलग है। सायन राशिचक्र वसन्त सम्पात से आरम्भ होता है; वैदिक ज्योतिष का निरयण राशिचक्र नक्षत्रों पर स्थिर है। दोनों के बीच लगभग 24 अंश का अन्तर आ चुका है, इसलिए पाश्चात्य राशि के पहले तीन सप्ताह में जन्मे लोग प्रायः पिछली राशि में आते हैं।

राशिफल सूर्य राशि पर आधारित है या चन्द्र राशि पर?

चन्द्र राशि पर। भारतीय और नेपाली प्रयोग में आपकी राशि वही है जिसमें जन्म के समय चन्द्रमा था। दैनिक राशिफल उसी राशि से गिने गए गोचर चन्द्रमा को पढ़ता है, इसीलिए चन्द्रमा के चलने के साथ हर एक-दो दिन में भविष्यवाणी बदलती है।

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