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14 जनवरी – 12 फ़रवरी

मकर राशि

संक्षेप में

4/ 5 · समग्र

मकर राशि, रविवार, 25 अक्टूबर 2026: 5 में से 4 — चन्द्रमा मीन राशि (रेवती नक्षत्र) में, मकर से तृतीय भाव में।

चन्द्रमा तीसरे भाव में है, जो उसकी शुभ स्थितियों में से एक है। साहस लौटता है, छोटी यात्राएँ सफल रहती हैं और टाली हुई बातचीत आसान निकलती है।

चन्द्रमा के नक्षत्र पर बुध का शासन है, जो वाणी, व्यापार और कागज़ी काम को गति देता है। संदेश लिखें, बिल भेजें, फ़ोन कर लें।

विस्तार से

प्रेम और सम्बन्ध

4

सुलह के लिए अच्छा समय। अभी माँगी गई क्षमा बहुत सस्ती पड़ती है और बहुत कुछ बचा लेती है।

करियर और कार्यक्षेत्र

4

आज आप असामान्य रूप से दिख रहे हैं — काम पर अपना नाम लगाएँ, उसे गुमनाम न जाने दें।

धन और वित्त

2.5

बिना बजट के खर्च एक साथ आएँगे। आरक्षित राशि रखें और गैर-ज़रूरी सब टालें।

स्वास्थ्य और ऊर्जा

3.5

छोटी बातों का ध्यान रखें: पानी, स्क्रीन का समय, और खड़े-खड़े खाया गया भोजन।

शुभ अंक
8
शुभ रंग
केसरिया
शुभ समय
18:00 – 19:30

सुझाया गया उपाय

पूर्व दिशा की ओर मुख करके ग्यारह बार गायत्री मंत्र का जप करें।

मकर राशि का परिचय

मकर चढ़ती है। शनि के स्वामित्व वाली यह चर पृथ्वी राशि किसी काम के लम्बे, नीरस मध्य के लिए बनी है — और वहाँ पहुँच भी जाती है। मकर के लोग कम उम्र में उत्तरदायित्व उठा लेते हैं, प्रायः उससे भी पहले जितना उचित था, और उसे बिना अधिक शिकायत ढोते हैं। उन्हें शुरू में कम आँका जाता है, बाद में शायद ही कभी। कीमत है रुक पाने की कठिनाई और सुविधा के प्रति सन्देह। मकर को यही सीखना है कि विश्राम असफलता नहीं है।

मकर राशि, जिसे अंग्रेज़ी में Capricorn कहते हैं, निरयण राशिचक्र में मकर की राशि है और इसके स्वामी शनि हैं। यह पृथ्वी तत्व की चर राशि है — वैदिक ज्योतिष में यही जोड़ी बताती है कि कोई राशि काम आरम्भ करती है, उसे थामे रखती है, या उसके अनुसार ढल जाती है।

निरयण राशिचक्र में सूर्य लगभग 14 जनवरी से 12 फ़रवरी तक मकर में रहता है। पाश्चात्य ज्योतिष सायन राशिचक्र मानता है, जिसमें Capricorn की अवधि 22 दिसंबर – 19 जनवरी है। दोनों में लगभग 24 अंश का अन्तर है — यही अयनांश है — और इसी कारण आपकी वैदिक राशि प्रायः पाश्चात्य राशि से एक पहले पड़ती है।

मकर में उत्तराषाढ़ा (पाद 2–4), श्रवण, धनिष्ठा (पाद 1–2) आते हैं। प्रत्येक राशि 30 अंश की होती है और उसमें सवा दो नक्षत्र समाते हैं, इसलिए नक्षत्र किसी ग्रह की स्थिति राशि से कहीं अधिक सूक्ष्मता से बताता है — और आपकी विंशोत्तरी दशा का क्रम भी नक्षत्र से ही तय होता है।

भारतीय और नेपाली परम्परा में आपकी राशि चन्द्र राशि होती है, अर्थात् जन्म के समय चन्द्रमा जिस राशि में था — सूर्य नहीं। मन का कारक चन्द्रमा है, और दैनिक राशिफल वास्तव में आपकी राशि से गिने गए चन्द्रमा के दैनिक गोचर को ही पढ़ता है।

परम्परागत मिलान में मकर को वृषभ, कन्या के साथ सहज धरातल मिलता है, जहाँ तत्व और स्वामी ग्रह सहमत होते हैं। कर्क अधिक परिश्रम माँगती है — असंगति नहीं, बल्कि गति और प्राथमिकता का अन्तर, जिसे मान लेने के बजाय कह देना पड़ता है। अष्टकूट गुण मिलान केवल राशि नहीं, आठ कारक देखता है, इसलिए राशि-से-राशि अनुकूलता को अन्तिम निर्णय नहीं, पहला संकेत मानें। मकर राशि मिलान — मकर की किन राशियों से पटती है

स्वामी ग्रह
शनि
तत्व
पृथ्वी
स्वभाव
चर
प्रतीक
मकर
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा (पाद 2–4), श्रवण, धनिष्ठा (पाद 1–2)
सूर्य का इस राशि में गोचर
14 जनवरी – 12 फ़रवरी
पाश्चात्य (सायन) तिथियाँ
22 दिसंबर – 19 जनवरी
रत्न
नीलम
शुभ दिन
शनिवार

नक्षत्र

विधि

यह राशिफल किस गणना पर आधारित है

यह भविष्यवाणी जिन निरयण स्थितियों से निकाली गई है, वे नीचे दी गई हैं। इनमें से हर एक को आप किसी भी पंचांग से मिला सकते हैं।

चन्द्रमा
मीन
सूर्य
तुला
चन्द्र नक्षत्र
रेवती · पाद 2
तिथि
चतुर्दशी · शुक्ल पक्ष
चन्द्र गोचर
तृतीय भाव (आपकी राशि से)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मकर राशि की तिथियाँ क्या हैं?

निरयण राशिचक्र में सूर्य प्रतिवर्ष लगभग 14 जनवरी से 12 फ़रवरी तक मकर में गोचर करता है। पाश्चात्य सायन राशिचक्र में Capricorn की अवधि 22 दिसंबर – 19 जनवरी है। लगभग तीन सप्ताह का यह अन्तर अयनांश है — नक्षत्र-आधारित और सम्पात-आधारित राशिचक्रों के बीच संचित अयन-गति।

मकर राशि का स्वामी ग्रह कौन है?

मकर के स्वामी शनि हैं। मकर की कुण्डली पढ़ते समय उस ग्रह की स्थिति — उसकी राशि, भाव, दृष्टि और दशा — सबसे अधिक महत्व रखती है।

मकर राशि में कौन-से नक्षत्र आते हैं?

उत्तराषाढ़ा (पाद 2–4), श्रवण, धनिष्ठा (पाद 1–2)। एक राशि 30 अंश की होती है और उसमें सवा दो नक्षत्र आते हैं, इसलिए नक्षत्र ग्रह की स्थिति राशि से कहीं अधिक सूक्ष्मता से तय करता है और विंशोत्तरी दशा का क्रम भी वही निर्धारित करता है।

मेरी वैदिक राशि पाश्चात्य राशि से अलग क्यों है?

क्योंकि दोनों राशिचक्रों का आरम्भ-बिन्दु अलग है। सायन राशिचक्र वसन्त सम्पात से आरम्भ होता है; वैदिक ज्योतिष का निरयण राशिचक्र नक्षत्रों पर स्थिर है। दोनों के बीच लगभग 24 अंश का अन्तर आ चुका है, इसलिए पाश्चात्य राशि के पहले तीन सप्ताह में जन्मे लोग प्रायः पिछली राशि में आते हैं।

राशिफल सूर्य राशि पर आधारित है या चन्द्र राशि पर?

चन्द्र राशि पर। भारतीय और नेपाली प्रयोग में आपकी राशि वही है जिसमें जन्म के समय चन्द्रमा था। दैनिक राशिफल उसी राशि से गिने गए गोचर चन्द्रमा को पढ़ता है, इसीलिए चन्द्रमा के चलने के साथ हर एक-दो दिन में भविष्यवाणी बदलती है।

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